Thursday, April 16, 2015

काश !!

वो अनकही बातें
वो अनखुले राज़
जिनको मैं खुद न समझ सकी
काश तुम्हें समझा पाती।

वो दबी हुयी सी
मंद मंद सिसकियाँ
जिनको मैं खुद न सुन सकी
काश तुम्हें सुना पाती।

वो डरी हुयी सी
घबराहट भरी धड़कनें
जिन्हें महसूस न कर सकी
काश तुम्हें बता पाती।

Tuesday, April 7, 2015

मन की हलचल

मन में दबी कुछ बातों को
कुछ अनकहे जज़्बातों को
क्यों छुआ तूने अविरल
मन में हो गयी क्यों हलचल

वर्षो से जो मौन खड़े थे
निर्मोह चुपचाप बढ़े थे
उन स्थिर चट्टानों से
क्यों बहती अश्रुधारा कलकल
मन में हो गयी क्यों हलचल

जग ने मुझको निश्छल जाना
गुण और स्वाभाव से स्थिर माना
आज क्यों अनायास ही
एक चक्रवात उठता है प्रतिपल
मन में हो गयी क्यों हलचल

Tuesday, February 10, 2015

दिल्ली में अब हार जीत का चिंतन करिये आप
आप दिलों में घुस गयी दिल्ली में चुपचाप
दिल्ली में चुप चाप कह रहे ये सबसे मोदी
जीती हुयी सारी सीटें हमने इसबार खोदी
न चला ओबामा न पड़ा अमित शाह भारी
बेदी को सब भूल गए है अरविन्द की बारी।

Saturday, August 9, 2014

rakhi

प्यार दुलार
आशीष से बंधी
राखी की डोर।

Thursday, June 5, 2014

पांखुरी गुलाब की

1.
तुझसे जुड़ी
सुनहरी हैं यादें
मिठास भरी।
2.
गुलाब संग
काँटों की चुभन
मन कोमल।
3.
है साथ तेरा
गुलाब की पांखुरी
भंवरा मन।
4.
नीला आकाश
जगमगाती धूप
सूखी धरती।
5.
बन के पंछी
उड़ा मन बाँवरा
टूटे बंधन।
6.

Monday, June 2, 2014

चलो महान बनें
जमीं से उठ कर
आसमान बनें

चलो माफ़ कर दें
उस

Saturday, May 31, 2014

तेरी याद


जब हंसती हूँ मुस्कुराती हूँ
तब याद करती हूँ तुम्हें
जब गिरने से संभल जाती हूँ
तब याद करती हूँ तुम्हें

अनायास कुछ आहट होती
या मुझसे कोई गलती होती
जब गीत कोई गुनगुनाती हूँ
तब याद करती हूँ तुम्हें

भारीपन होता जब दिल में
सूनापन होता महफ़िल में
जब भी मैं अश्रु छलकाती हूँ
तब याद करती हूँ तुम्हे

खुशियों के उन चंद क्षणों में
एहसास मिला जो अपनेपन का
उन यादों में जब खो जाती हूँ
तब याद करती हूँ तुम्हें।

विभूती