Wednesday, May 15, 2013

माँ

मैं जब मुस्कुराती हूँ  ...
तो आपको हँसते पाती हूँ,
गर हूँ परेशान ..
तो तुम आँसू छलकाती हो।
कर दूँ कोई गलती..
तो मुझको समझाती हो।
जीतने पर मेरे...
आप गर्व से इठलाती हो।
हार जाऊं तो
मेरा साहस बन जाती हो..।

क्या पता तुम इतना सब
कैसे कर पाती हो ...
माँ तुम किस जादुई छड़ी से...
कभी शिक्षक...
कभी सहेली...
कभी मार्गदर्शिता बन जाती हो।।।???

Sunday, April 14, 2013

तेरी ख़ुशबू !!


दूरियां जितनी भी हो 
खुद को समझती हूँ मैं 
रोज बस इसी तरह ...
तेरी ख़ुशबू  ओढ़  कर सो जाती हूँ मैं 


वो एकाकीपन का मिलना 
तेरी मुस्कान पे मेरे अधरों का खिलना 
रोज़ बस इसी तरह ...
यादों के भंवर में खो जाती हूँ मैं 

ये बेरुखी ये फासले 
कहीं कम न हो जाये मेरे हौसले 
रोज़ बस इसी तरह ..
क्यूँ ये सोच के घबरा जाती हूँ मैं 

न हो भले हाथों में हाथ 
तू हमेशा है मेरे साथ 
रोज़ बस इसी तरह ...
यूँ गिर के संभल जाती हूँ मैं 
तेरी ख़ुशबू ओढ़ के सो जाती हूँ मैं !!!

Tuesday, March 26, 2013

Holi

लो फिर आ गयी होली 
साथ अपने लिये 
बचपन की यादों की टोली 

बहुत याद आती है 
गुब्बारों की मार 
आज भी भिगो देती है 
पिचकारी की धार 
लो फिर आ गयी होली ,,,

टेसू के फूलों से 
रंग को बनाना 
चन्दन की खुशबू से 
घर का महक जाना 
लो फिर आ गयी होली,,,

रिश्तों में घुलती 
गुजिया की मिठास 
गुलाल के रंगों में 
अपनेपन का आभास 
लो फिर आ गयी होली,,,

आज फिर से है आया 
होली का त्यौहार 
रासायनिक से रंगों का 
संग लिए उपहार 

गुजिया में भरा है 
क्यूँ नकली सा मावा 
चन्दनो को लिए 
कर रहे सब दिखावा 

आओ चलें हम 
मिलावट से दूर 
रंगों से बांटें 
खुशियाँ भरपूर 

लो फिर आ गयी होली .....

"विभूति"

Sunday, March 24, 2013

है इतना शोर  चारों ओर 
सुकुन के पल ढूंढती  हूँ
हँसी के ठहाकों में
पहले सी ख़ुशी ढूंढती हूँ

आजकल मैं अकेले ही
मुशकिलों का हल  ढूंढती  हूँ
पुरानी तस्वीरों  में 
साथ बीते क्षण  ढूंढती  हूँ

हो साथ तुम मेरे
फिर भी क्यों  तुमको  ढूंढती  हूँ
व्यवस्थित  से जीवन में 
खालीपन को  ढूंढती  हूँ